भारत बनाएगा अपने लड़ाकू विमानों के इंजन! फ्रांस की कंपनी के साथ होगी ऐतिहासिक डील, अमेरिका पर नहीं रहनी पड़ेगी निर्भरता

Follow Us On instagram Follow Now
Subscribe Youtube Channel subscribe Now

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अब भारत के तेजस और भविष्य के लड़ाकू विमानों में ‘दिल’ (इंजन) भी स्वदेशी होगा! जी हाँ, लड़ाकू विमानों के इंजन के मामले में भारत जल्द ही अमेरिका जैसे देशों पर अपनी निर्भरता पूरी तरह से खत्म करने वाला है। भारत का डीआरडीओ (DRDO) और फ्रांस की प्रसिद्ध एयरोस्पेस कंपनी सफ्रान (Safran) मिलकर देश में ही उन्नत जेट इंजन बनाएंगे। कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस ऐतिहासिक परियोजना को हरी झंडी दे सकती है।

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत फ्रांसीसी कंपनी सफ्रान, भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए 120 किलोन्यूटन का शक्तिशाली इंजन विकसित करने में मदद करेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें 100% प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण (Technology Transfer) होगा, यानी भारत को इंजन बनाने की पूरी तकनीक मिल जाएगी।

जल्द मिल सकती है मंजूरी
वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, DRDO जल्द ही इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजेगा। डीआरडीओ का गैस टरबाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) इस प्रोजेक्ट को अंजाम देगा, जिसकी अनुमानित लागत करीब 7 अरब डॉलर है।

इस सफलता के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों के एक्सक्लूसिव क्लब में शामिल हो जाएगा जो अपने लड़ाकू विमानों के इंजन खुद डिजाइन और विकसित कर सकते हैं। फिलहाल यह क्षमता सिर्फ अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के पास ही है। हैरानी की बात यह है कि चीन के पास भी अभी तक अपनी खुद की यह तकनीक नहीं है।

लड़ाकू विमानों के इंजन

भारत फोर्ज ने भी की ब्रिटेन की कंपनी के साथ साझेदारी
इसी कड़ी में, इंजीनियरिंग कंपनी भारत फोर्ज लिमिटेड ने ब्रिटेन की कंपनी विंडरेसर्स लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। यह साझेदारी भारत में मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) की तैनाती के लिए है।


पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या यह इंजन पूरी तरह से स्वदेशी होगा?

यह एक संयुक्त परियोजना है, लेकिन इसमें 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रावधान है। इसका मतलब है कि भारत को इंजन डिजाइन, विकास और निर्माण की पूरी जानकारी और तकनीक हासिल होगी, जिससे भविष्य में हम पूरी तरह से स्वदेशी इंजन बना सकेंगे।

2. इस डील से भारत को सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?

सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर (Self-Reliant) बनेगा। हमें लड़ाकू विमानों के लिए इंजन आयात करने पर अरबों डॉलर खर्च नहीं करने पड़ेंगे। साथ ही, इससे देश में उच्च-तकनीक विनिर्माण (Hi-Tech Manufacturing) को बढ़ावा मिलेगा और हजारों स्किल्ड जॉब्स पैदा होंगी।

3. क्या भारत पहले भी ऐसे इंजन बनाने की कोशिश कर चुका है?

हाँ, भारत ने कावेरी इंजन जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम किया है, लेकिन वे पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए थे। इस नई संयुक्त परियोजना में एक वैश्विक विशेषज्ञ (सफ्रान) की साझेदारी होने से सफलता की संभावना काफी अधिक है।

Leave a Comment