अब AI App बताएगा दिल का हाल! हार्ट अटैक से मौत के आंकड़े होंगे कम, जानें कैसे करेगा काम

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कल्पना कीजिए, आपके स्मार्टफोन में एक ऐसा ऐप है जो आपके दिल की धड़कनों पर नजर रखता है और पहले ही आपको चेतावनी दे देता है कि, “भाई साहब, जरा संभलकर, दिल पर जोर पड़ रहा है!” यह कोई मजाक नहीं, बल्कि तकनीक की एक अद्भुत देन है। लखनऊ के लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर राठौर ने बताया कि Artificial Intelligence (AI) पर आधारित ऐप्स अब दिल की सेहत पर नजर रखने में सक्षम हैं। इससे हार्ट अटैक और अन्य गंभीर बीमारियों से होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम करने में मदद मिल सकती है।

यह जानकारी संस्थान में आयोजित पांचवें रिसर्च डे कार्यक्रम में सामने आई। डॉ. राठौर ने बताया कि मरीजों के इलाज में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से काफी फायदा हो रहा है। AI की मदद से न सिर्फ बीमारी का पता लगाना आसान हुआ है, बल्कि हार्ट रिहैबिलिटेशन में भी इसका उपयोग होने लगा है।

कैसे काम करेगा यह AI ऐप?
यह AI ऐप एक स्मार्ट डॉक्टर की तरह काम करेगा। यह आपकी दैनिक गतिविधियों और स्वास्थ्य डेटा का विश्लेषण करके दिल की बीमारियों के खतरे का पता लगा सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह स्वस्थ व्यक्तियों में भी भविष्य में होने वाली बीमारी के जोखिम को पहचान सकता है, जिससे समय रहते सावधानी बरती जा सके। इस तरह, यह तकनीक कार्डियोलॉजिस्ट की कमी को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

एंजियोप्लास्टी या बाईपास के बाद भी जरूरी है सतर्कता
डॉक्टरों ने एक महत्वपूर्ण बात यह भी बताई कि एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी के बाद भी मरीजों को पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए। थोड़ी सी भी लापरवाही दोबारा खतरे में डाल सकती है। इसलिए, सर्जरी के बाद कार्डियक रिहैबिलिटेशन बेहद जरूरी है। नियमित रूप से पैदल चलना, डॉक्टर की सलाह लेना, समय-समय पर जांच कराना और रोजाना दवाएं लेना बहुत महत्वपूर्ण है।

AI App

कोरोना के बाद क्यों बढ़ रहे हैं दिल के मरीज?
डॉक्टरों के मुताबिक, कोरोनाकाल के बाद दिल की बीमारियों के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। इसकी मुख्य वजह खराब जीवनशैली, तला-भुना और फास्ट फूड का अधिक सेवन, और बढ़ता तनाव है। हैरानी की बात यह है कि तनाव अब युवाओं का दिल भी कमजोर कर रहा है। लगभग 30% मरीजों में बीमारी के दोबारा लौटने का खतरा बना रहता है।

सीधे शब्दों में कहें तो, अब आपका स्मार्टफोन आपके दिल का True Friend बनने वाला है। तकनीक की इस मदद से हम हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारियों पर पहले ही विजय पा सकते हैं। बस जरूरत है तो अपनी लाइफस्टाइल में थोड़ा सुधार लाने की और इस AI ऐप की मदद लेने की!


पाठकों के सवाल (FAQs)

1. क्या एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह ठीक हो जाता है?

जी नहीं। सर्जरी समस्या का एक समाधान है, लेकिन यह दिल की बीमारी को पूरी तरह खत्म नहीं करती। सर्जरी के बाद भी मरीज को जीवनशैली में सुधार, नियमित दवाएं और डॉक्टर के संपर्क में रहना बेहद जरूरी है। लापरवाही बरतने पर दोबारा खतरा हो सकता है।

2. क्या यह AI ऐप सच में एक डॉक्टर की जगह ले सकता है?

बिल्कुल नहीं। यह ऐप सिर्फ एक सहायक उपकरण है जो आपको शुरुआती चेतावनी और नियमित निगरानी की सुविधा देता है। इससे मिली किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले किसी Qualified Cardiologist से सलाह लेना हमेशा जरूरी है। यह डॉक्टर की जगह नहीं, बल्कि उनकी मदद करने का एक जरिया है।

3. कोरोना के बाद दिल की बीमारियाँ बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?

कोरोना काल के दौरान और बाद में लोगों की जीवनशैली पूरी तरह बदल गई। शारीरिक गतिविधि कम होना, अस्वस्थ खानपान, लंबे समय तक तनाव और महामारी का मानसिक प्रभाव—ये सभी factors दिल की सेहत पर बुरा असर डालते हैं। इसीलिए, इन दिनों दिल के रोगियों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी जा रही है।

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